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What is Excess Demand and it's related concept

  We know that Equilibrium level of income and employment is determined when AD curves intersects the AS curve. If the equilibrium level exceeds the full employment level, then there is Excess Demand in the economy. However if Equilibrium level falls short of full employment level, then it is a situation of Deficient Demand.  According to Keynes :-  The Equilibrium level of employment may or may not be the full employment level. It means Equilibrium level may exceed or fall short of full employment level. What is Excess Demand? Excess demand refers to the situation when aggregate demand is more than the aggregate supply corresponding to full employment level of output in the economy.  It is the excess of anticipated expenditure over the value of full employment output . What is Inflationary Gap? Inflationary Gap refers to the gap by which actual aggregate demand exceeds the aggregate demand required to establish full employment Equilibrium. Excess demand gives rise t...

arthvyavastha ki kendriya samasya kya hai ?

1. अर्थव्यवस्था की केंद्रीय समस्याएं: किसी भी अर्थव्यवस्था में केंद्रीय समस्याएं उत्पन्न होने की वजह से उस अर्थव्यवस्था की गति पर काफी प्रभाव पड़ता है। किसी भी अर्थव्यवस्था में केंद्रीय समस्याएं इसलिए उत्पन्न होती हैं क्योंकि हमारे पास संसाधन सीमित रूप में है जबकि हम सब की आवश्यकताएं और सीमित हैं यही कारण है कि हमारे समक्ष कई सारी केंद्रीय समस्याएं उत्पन्न होती हैं यह केंद्रीय समस्याएं निम्नलिखित हैं: * क्या उत्पादन किया जाए: क्या उत्पादन किया जाए एक ऐसी समस्या से हैं जिसके अंतर्गत एक उत्पादक किस तरीके से यह निश्चित करता है कि उसे किस वस्तु का उत्पादन कितनी मात्रा में करना है। . क्या उत्पादन किया जाए यह एक केंद्रीय समस्या इसलिए मानी जाती है क्योंकि कोई भी उत्पादक किसी वस्तु का उत्पादन करने से पहले यह चयन करता है कि उसे किस वस्तु का उत्पादन कितनी मात्रा में करना है क्योंकि हमारे पास संसाधन सीमित हैं एवं हमारी आवश्यकताएं असीमित है इसलिए हमारे समक्ष यह केंद्रीय समस्या उत्पन्न होती है कि हमें क्या उत्पादन करना चाहिए। . इस केंद्रीय समस्या में किसी भी उत्पादक को दो वस्तुओं के...

arthvyavastha kya hoti hai ?

अर्थव्यवस्था से आपका क्या तात्पर्य है? अर्थव्यवस्था वह प्रणाली है जहां पर सभी लोग अपने जीवन के लिए आवश्यक जीविका को अर्जित करते हैं जिससे कि वह अपने जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त कर सके । उदाहरण : हम अपने आस-पास कई सारे कारखाने एवं खदानों को देखते हैं यह सभी मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था के अंतर्गत आते हैं क्योंकि कई सारे लोग यहां पर कार्य करते हैं और कार्य करके वह आय अर्जित करते हैं जिससे कि वह अपने जीवन के लिए आवश्यक सभी वस्तुओं को प्राप्त कर सके। * अर्थव्यवस्था की मुख्य गतिविधियां: . उत्पादन . उपभोग . निवेश या पूंजी का निर्माण करना। * अर्थशास्त्र का अध्ययन क्यों किया जाता है? अर्थशास्त्र का अध्ययन मुख्य रूप से इसलिए किया जाता है जिससे कि अर्थव्यवस्था में मौजूद समस्याओं का पता लगाया जा सके। अर्थशास्त्र को मुख्य रूप से दुर्लभता की स्थिति में व्यक्त किया जाता है। . हम सभी जानते हैं की हमारी आवश्यकताएं असीमित है  जबकि संसाधन सीमित है अतः इसी कारण हमारे समक्ष कई सारी समस्याएं आती हैं जिनका हमें सामना करना पड़ता है और वह सारी समस्याएं हमारी अर्थव्यवस्था ...

What are the basic formulas of Aggregate demand ?

Aggregate demand and Aggregate Supply . This is part two of aggregate demand and aggregate supply . In this chapter I will provide you some important questions and answers which are important for exam. Basic formulas of aggregate demand and aggregate supply:

सरकारी बजट क्या होता है?

Introduction: आज के समय में यदि कोई भी देश अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारना चाहता है तथा अपने देश का विकास करना चाहता है तो हर एक देश को यह सभी कार्य करने के लिए बजट बनाने की आवश्यकता होती है जिसके माध्यम से वह देश या वहां कि सरकार यह तय कर सके कि किस क्षेत्र में हमें कितना पैसा खर्च करना है एवं किस क्षेत्र से हमें पैसा मिलेगा और अन्य मुद्रा से संबंधित फैसले वहां की सरकार ले सके जिससे कि उसके देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके उस देश का विकास हो सके। 1. Government budget: ( सरकारी बजट) सरकारी बजट मुख्य रूप से एक वित्तीय वर्ष में सरकार द्वारा किए जाने वाले सभी व्यय एवं सरकार की प्राप्ति हो के अनुमान का विवरण होता है। . सरकारी बजट मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था की समृद्धि एवं स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करता है साथ ही साथ यह सरकार के राजकोषीय नीति को भी प्रकट करता है जिससे हम बजट की नीति भी कह सकते हैं। * सरकारी बजट के उद्देश्य: बजट किसी भी देश कि सरकार के लिए काफी आवश्यक होता है क्योंकि बजट में ही सरकार  तय करती है कि सरकार के पास कितनी प्राप्ति आने वाली है और कितना व्यय सर...

भुगतान शेष खाता क्या होता है और ये कितने प्रकार के होते हैं?

1. Balance of payments: ( भुगतान शेष ) भुगतान शेष से अभिप्राय एक देश द्वारा शेष विश्व के साथ किए गए आर्थिक सौदों के विवरण से है। * आर्थिक सौदों में निम्नलिखित चीजें आती हैं:  . दृश्य मदें . अदृश्य मदें . शेष विश्व में परिसंपत्तियों के स्वामित्व में परिवर्तन से संबंधित सौदे 2. भुगतान शेष खाता: भुगतान शेष खाते से अभिप्राय कैसे खाते से है जो 1 वर्ष के दौरान एक देश द्वारा शेष विश्व के साथ किए जाने वाले सभी प्रकार के मौद्रिक व्यवहारों को भुगतान शेष खाते में लेखांकन किया जाता है। * भुगतान शेष खाते में दो प्रकार के खाते होते हैैं:  . Current account ( चालू खाता) चालू खाते में मुख्य रूप से दृश्य एवं अदृश्य मदों के आयात एवं निर्यात से जो किसी देश को प्राप्ति होती है या फिर जो भुगतान उसके द्वारा किया जाता है उसको चालू खाते में लेखाअंकित किया जाता है। . Capital account ( पूंजी खाता) पूंजी खाते से अभिप्राय ऐसे खाते से हैं जिसमें उन सभी सौदों को लिखा जाता है जो एक देश द्वारा शेष विश्व में उनके निवासियों के परिसंपत्तियों के स्वामित्व में जो परिवर्त...

मांग का मतलब क्या होता है ?

1. मांग किसे कहते हैं ? मांग  से अभिप्राय किसी वस्तु की उच्च मात्रा से है जिसे एक उपभोक्ता किसी निश्चित कीमत एवं निश्चित समय पर खरीदने के लिए तैयार होता है उसे उस वस्तु की मांग कहा जाता है। * बाजार मांग ( market demand) : बाजार मांग से अभिप्राय यह है कि जब कीमत के निश्चित स्तर पर किसी बाजार में सभी उपभोक्ताओं द्वारा वस्तु की खरीदी गई मात्राओं का योग बाजार मांग कहलाता है। *  मांग फलन ( demand function):   मांग फलन से अभिप्राय किसी वस्तु की मांग तथा उसे प्रभावित करने वाले कारकों के मध्य फलनात्मक संबंध से हैं। * मांग अनुसूची ( demand schedule) मांग अनुसूची से अभिप्राय किसी वस्तु की कीमत तथा मांग के संबंध से है जो तालिका के माध्यम से प्रदर्शित किया जाता है उसे मांग अनुसूची कहते हैं। * मांग में परिवर्तन ( change in demand) मांग में परिवर्तन से अभिप्राय यह है कि जब कीमत समान रहने पर किसी अन्य कारक में होने वाले परिवर्तन की वजह से जब किसी वस्तु की मांग घट या बढ़ जाती है तो उसे मांग में परिवर्तन कहा जाता है। * मांग की मात्रा में पर...

Propensity to consume kya hota hai ?

                 MACROECONOMICS            FOR CLASS 12th  1. समग्र मांग की परिभाषा: ( Aggregate demand meaning in Hindi ) समग्र मांग से अभिप्राय एक अर्थव्यवस्था में 1 वर्ष के दौरान सभी वस्तुओं एवं सेवाओं की मांग करने के लिए उपभोक्ताओं द्वारा की  जाने वाली योजना से है। 2. समग्र मांग के घटक : ( Components of aggregate demand) . समग्र मांग के निम्नलिखित घटक है:  * उपभोग व्यय  * उत्पादक निवेश व्यय  * समग्र मांग : उपभोग व्यय+उत्पादक निवेश व्यय 3.  बचत फलन ( saving function meaning in hindi) बचत फलन बचत और आय के बीच फलनात्मक संबंध को दर्शाता है। 4. उपभोग प्रवृत्ति की परिभाषा :  (   Propensity to consume meaning in hindi) उपभोग प्रवृत्ति से अभिप्राय यह है कि एक उपभोक्ता अपनी आय का कितना भाग उपभोग करता है। * उपभोग प्रवृत्ति के प्रकार : . औसत उपभोग प्रवृत्ति . सीमांत उपभोग प्रवृत्ति * औसत उपभोग प्रवृत्ति: ( Propensity to ...

निवेश क्या होता है और निवेश कितने प्रकार के होते हैं ?

  Basic concepts of  Microeconomics 1. निवेश की अवधारणा और उसके घटक :  * निवेश क्या है ?  निवेश से अभिप्राय एक ऐसी प्रक्रिया से है  जिसमें हम पूंजी का निर्माण करते हैं। * निवेश के प्रकार :  निवेश दो प्रकार के होते हैं :  * स्थिर निवेश * माल सूची निवेश * स्थिर निवेश :  स्थिर निवेश से अभिप्राय 1 वर्ष के दौरान किसी उत्पादक के पास मौजूद उसकी स्थिर परिसंपत्तियों में होने वाली वृद्धि से है। जब कोई उत्पादक अपने स्थिर परिसंपत्तियों की खरीद पर कोई खर्च करता है तो उसे स्थिर निवेश कहते हैं। * माल सूची निवेश :  माल सूची निवेश से अभिप्राय किसी एक समय पर उत्पादक के पास जो उस स्टॉक मौजूद होता है जिसमें निम्नलिखित वस्तुएं शामिल होती हैं:  . तैयार वस्तुएं . अर्ध तैयार वस्तु  . कच्चा माल सम्मिलित होता है इसे माल सूची स्टॉक कहते हैं। 2. सकल निवेश शुद्ध निवेश तथा मूल्य ह्रास की अवधारणा :  * सकल निवेश:  सकल निवेश व निवेश होता है जिसमें 1 वर्ष के दौरान उत्पादक के द्वारा अपनी नई परिसंपत्तियों पर किया ...

अंतिम वस्तुएं एवं मध्यवर्ती वस्तुएं क्या होती है?

आज मैं आपको समष्टि अर्थशास्त्र के कुछ मूल अवधारणाओं के बारे में बताने वाला हूं। मुझे उम्मीद है कि समष्टि अर्थशास्त्र की अवधारणाएं आपके लिए काफी उपयोगी साबित होंगी। PART - 1 1. अर्थव्यवस्था में उत्पादित होने वाली वस्तुओं के प्रकार निम्नलिखित हैं: * अंतिम वस्तुएं एवं मध्यवर्ती वस्तुएं * उपभोक्ता वस्तुएं एवं पूंजीगत वस्तुएं * अंतिम वस्तुएं :  अंतिम वस्तुएं व वस्तुएं होती हैं जो अपने उत्पादन की अंतिम सीमा रेखा को पार कर चुकी होती हैं तथा अपने अंतिम प्रयोग करता के द्वारा प्रयोग में लाने के लिए तैयार होती हैं उन्हें अंतिम वस्तुएं कहते हैं। . अंतिम प्रयोग करता कौन होता है? अंतिम प्रयोग करता में निम्नलिखित लोग आते हैं: * उपभोक्ता * उत्पादक * मध्यवर्ती वस्तुएं : मध्यवर्ती वस्तुएं व वस्तुएं होती हैं जिन्होंने अभी तक अपने उत्पादन की अंतिम सीमा रेखा को पार नहीं किया होता है तथा अभी भी इनके मूल्य में वृद्धि की जानी होती है एवं ये अपने अंतिम प्रयोग करता द्वारा प्रयोग में भी लाने के लिए तैयार नहीं होते हैं। * उपभोक्ता वस्तुएं : उपभोक्ता वस्तुएं व वस...

विदेशी विनिमय दर क्या होता है?

आज मैं आप सभी को विदेशी विनिमय दर के बारे में बताने वाला हूं मैं आपको यह बताऊंगा कि विदेशी विनिमय दर क्या होती है और विदेशी विनिमय दर की प्रणाली के बारे में भी जानेंगे साथ ही हम यह देखेंगे की विदेशी विनिमय दर में वृद्धि एवं कमी होने पर ग्राफ का निर्धारण  किस तरीके से किया जाता है। 1. विदेशी विनिमय दर क्या है ?  विदेशी विनिमय दर वह दर है जिस पर एक देश की घरेलू करेंसी को किसी दूसरे देश की करेंसी के साथ बदला जा सकता है उसे विदेशी विनिमय दर कहते हैं। * विदेशी विनिमय दर प्रणाली :  विदेशी विनिमय दर प्रणाली दो प्रकार की हैं :  . स्थिर विनिमय दर प्रणाली . नम्य विनिमय दर प्रणाली * स्थिर विनिमय दर प्रणाली : स्थिर विनिमय दर प्रणाली वह प्रणाली है जिसमें विनिमय की दर सरकार के माध्यम से निर्धारित किया जाता है। * नम्य विनिमय दर प्रणाली :  नम्य विनिमय  दर प्रणाली में विनिमय दर का निर्धारण मांग सिद्धांत एवं पूर्ति सिद्धांत के माध्यम से होता है इस सिद्धांत के अनुसार किसी भी देश के करेंसी की विनिमय दर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में उसकी मांग तथा...

मुद्रा का अर्थ एवं मुद्रा के प्रकार?

मैं आपको आज मुद्रा के बारे में बताने वाला हूं आज हम पढ़ेंगे  कि हमें मुद्रा की आवश्यकता क्यों पड़ी साथ ही साथ हम यह भी जानेंगे की मुद्रा क्या है और किस तरीके से हमारे देश में मुद्रा की पूर्ति की जाती है। मुद्रा से संबंधित  जानकारियां मैं आप सभी को देने का प्रयास करूंगा । 1. मुद्रा का अर्थ ? मुद्रा से अभिप्राय एक ऐसी वस्तु से है , जो विनिमय के माध्यम में सामान्य रूप से स्वीकार की जाती है उसे हम मुद्रा कहते हैं। 2. मुद्रा के रूप :  मुद्रा का विवरण दो ग्रुप में किया जा सकता है :  * आदेश मुद्रा तथा न्यास मुद्रा * पूर्ण काय मुद्रा तथा साख मुद्रा * आदेश मुद्रा :  . आदेश मुद्रा व मुद्रा होती है जो सरकार के आदेश पर जारी की जाती है इसमें सभी प्रकार के सिक्के व नोट शामिल किए जाते हैं। . आदेश मुद्रा को एक देश में रहने वाले व्यक्तियों को कानूनी तौर पर इसे विनिमय के माध्यम में स्वीकार करने के लिए बाध्य होना पड़ता है। *न्यास मुद्रा : न्यास मुद्रा वह मुद्रा होती है जो विनिमय के रूप में स्वीकार की जाती है क्योंकि यह मुद्रा प्राप्तकर्ता तथा...

What is Aggregate Demand and Aggregate Supply ?

1. Aggregate Demand: Aggregate Demand refers to the final value of goods and services which all the  buyers of an economy are palning to buy at given level of income during an accounting period.   * Diagram of Aggregate Demand: 2. Aggregate supply : Aggregate supply refers to the  money value of goods and services that all the producer are planing to supply in an economy in a given period of time . *Diagram of Aggregate supply : 3. Investment: It's refers to all those expenditure which are made on aquairing assets. * Two types of investment: 1. Autonomous investment 2. Induced investment  * Autonomous investment: Autonomous investment not do for profit motive and  they constant at any level of income. Diagram of autonomous investment: * Induced investment  Induced investment do for profit motive and they change when the level of income change. Diagram of induced investment:

Government Budget ( Class 12th Macroeconomics)

Government Budget : Government budget is an annual statement showing the item wise estimate recipet and expenditure during a fisical year Important point related to government budget: * Central government budget is known as union budget. * In India our budget is present in parliament. * President of India has right to decide the date of budget . * The finance minister of India is present the union budget in parliament. Objective of government budget: * Reallocation of resources *Economic growth * Management of public enterprises etc. Government Budget is divide in to category: 1. Revenue  and capital Receipt 2. Revenue and capital expenditure