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मुद्रा का अर्थ एवं मुद्रा के प्रकार?

मैं आपको आज मुद्रा के बारे में बताने वाला हूं आज हम पढ़ेंगे  कि हमें मुद्रा की आवश्यकता क्यों पड़ी साथ ही साथ हम यह भी जानेंगे की मुद्रा क्या है और किस तरीके से हमारे देश में मुद्रा की पूर्ति की जाती है। मुद्रा से संबंधित  जानकारियां मैं आप सभी को देने का प्रयास करूंगा ।


1. मुद्रा का अर्थ ?

मुद्रा से अभिप्राय एक ऐसी वस्तु से है , जो विनिमय के माध्यम में सामान्य रूप से स्वीकार की जाती है उसे हम मुद्रा कहते हैं।

2. मुद्रा के रूप : 

मुद्रा का विवरण दो ग्रुप में किया जा सकता है : 

* आदेश मुद्रा तथा न्यास मुद्रा
* पूर्ण काय मुद्रा तथा साख मुद्रा


* आदेश मुद्रा : 

. आदेश मुद्रा व मुद्रा होती है जो सरकार के आदेश पर जारी की जाती है इसमें सभी प्रकार के सिक्के व नोट शामिल किए जाते हैं।
. आदेश मुद्रा को एक देश में रहने वाले व्यक्तियों को कानूनी तौर पर इसे विनिमय के माध्यम में स्वीकार करने के लिए बाध्य होना पड़ता है।

*न्यास मुद्रा :

न्यास मुद्रा वह मुद्रा होती है जो विनिमय के रूप में स्वीकार की जाती है क्योंकि यह मुद्रा प्राप्तकर्ता तथा  अदा करता के मध्य  परस्पर विश्वास पर आधारित होती है इसलिए इसे न्यास मुद्रा कहा जाता है ।

* पूर्ण - काय मुद्रा : 

पूर्ण काय मुद्रा व मुद्रा होती है जो सिक्कों के रूप में जारी की जाती है जब पूर्ण काय मुद्रा को जारी किया जाता है तब पूर्ण काय मुद्रा की कीमत वस्तु की कीमत के बराबर होती है ।

* साख मुद्रा : 

साख मुद्रा मुद्रा होती है जिसका मौद्रिक मूल्य वस्तु के मौद्रिक मूल्य से  अधिक होता है।

3. मुद्रा के कार्य : 

मुद्रा के मुख्य रूप से दो कार्य होते हैं : 
* प्राथमिक कार्य
* गौण या सहायक कार्य

* मुद्रा के प्राथमिक कार्य निम्नलिखित हैं : 

* विनिमय का माध्यम
* मूल्य का मापदंड

* मुद्रा के गौण कार्य निम्नलिखित है :

* स्थगित भुगतानो का मान 
* मूल्य का संचयन

4. मुद्रा की पूर्ति क्या होती है ?

मुद्रा की पूर्ति से अभिप्राय एक निश्चित समय में देश में रहने वाले लोगों के पास मौजूद कुल मुद्रा से है।

* मुद्रा की पूर्ति से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदु :

. सरकार के पास जो मुद्रा होती है उस मुद्रा को हम मुद्रा पूर्ति में न शामिल नहीं करते हैं।
. देश में मौजूद सभी बैंकों के पास जो मुद्रा होती है उसको भी हम मुद्रा पूर्ति में शामिल नहीं करते हैं।

. सरकार के पास मौजूद मुद्रा तथा देश में मौजूद सभी बैंकों के पास जो मुद्रा होती है उसे हम मुद्रा पूर्ति में इसलिए शामिल नहीं करते हैं क्योंकि सरकार और देश के जो बैंक होते हैं वह हमारे देश में मुद्रा की पूर्ति करते हैं तथा उनके पास मौजूद उस मुद्रा के भाग को मुद्रा की पूर्ति में शामिल नहीं कर सकते हैं।

5. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या होती है ? 

वस्तु विनिमय प्रणाली वह प्रणाली होती है जहां पर सभी प्रकार के लेनदेन वस्तुओं के माध्यम से किए जाते हैं अर्थात वस्तु के बदले वस्तु का ही लेन- देन होना वस्तु विनिमय प्रणाली कहलाता है।

* वस्तु विनिमय प्रणाली में आने वाली निम्नलिखित कठिनाइयां थी : 

* आवश्यकताओं का द्वारा संयोग
* भविष्य में किए जाने वाले भुगतान में कठिनाई
* वस्तु की कीमत निर्धारण में कठिनाई
* वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाने में कठिनाई तथा उनको इकट्ठा करके रखने में कठिनाई।

6. हमें मुद्रा की आवश्यकता क्यों पड़ी ?

हमें मुद्रा की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि मुद्रा के आविष्कार से पहले अथवा मुद्रा के आने से पहले हमारे यहां वस्तु विनिमय प्रणाली प्रचलन में थी । वस्तु विनिमय प्रणाली में हमें कई सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता था इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए ही मुद्रा की खोज की गई और आज के समय में जितनी भी लेनदेन की प्रक्रियाएं की जाती हैं  लोगों के मध्य में वह मुद्रा के माध्यम से ही संपन्न होती हैं ,  इसलिए हमें मुद्रा की आवश्यकता पड़ी।

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